दातों के सडन और पायरिया से है परेशान तो यह आर्टिकल केवल आप के लिए है -जरूर पढ़ें

By | April 23, 2017
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दोस्तों आजकल हमारे समाज मे दातों के सडन और पायरिया की समस्या बढाती ही जा रही है जिसके कारन हमें समाज में सर्मिंदगी महसूस करनी पड़ती है

इसके लिए हम आपको दातों से सम्बंधित टिप्स देंगे अमे असह है की आपको बहुत बढ़िया लगेगा

दातों के सडन और पायरिया से उत्पन्न सांसों की दुर्गन्ध‍ के इलाज 

  1. मुंह के बैक्टीरिया से होती है सांस की बदबू और दातों के सडन और पायरिया ।

  2. बैक्टीरिया से निकलता है सल्फर कम्पाउंड ।

  3. मुंह अच्छी तरह से सफाई होती है बचाव ।

  4. अजमोद, पार्सली सौंफ आदि का सेवन करें।

सांस की बदबू से लोगों को अक्सर सामाजिक जगहों पर शर्मिंदा होना पड़ता है। सांस की बदबू (हैलाटोसिस) अक्सर मुंह एक बैक्टेरिया से होती है। इस बैक्टेरिया से निकलने वाले ‘सल्फर कम्पाउंड’ की वजह से सांस की बदबू पैदा होती है। जमी हुई श्लेष्मा और नाक और गले की नली, पेट और आंत की नली, मूत्र नली, रक्त में जमने वाले अन्य विषैले पदार्थों से भी सांस की बदबू उत्पन्न होती है।आप चाहें तो इससे छुटकारा पा सकती है। जानें सांसों की दुर्गंध से बचने के उपाय :-

(1)चिकित्सकों का मानना है कि मुंह की सफाई तब तक पूरी नहीं मानी जाती है जब तक जीभ की सफाई न हो। कई बार भोजन के बाद कुछ बारीक कण जीभ पर लगे रह जाते हैं जिन्हें अगर सही तरीके से साफ न करें तो भी सांसो से दुर्गंध आती है। ऐसे में ब्रश करते वक्त रोज जीभ को टंग क्लीनर से जरूर साफ करें जिससे सांसों की दुर्गंध और मुंह के संक्रमण से बचाव हो सके।

(2)पार्सली की टहनियों को बारीक काटकर, दो से तीन लवंग या चौथाई चम्मच पीसे हुए लवंग को दो कप पानी में उबालें। इसे ठंडा होने पर दिन में कई बार माउथवॉश की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। पानी खूब पीयें और पेट को साफ रखें।

(3)सौंफ़ एक मसाला है जो ज्यादातर खाना पकाने में इस्तेमाल किया जाता है। सौंफ़ भी बुरी सांसों से छुटकारा पाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। एक छोटा चम्मच सौंफ़ बीज को ले और अपने मुंह में डालकर धीरे धीरे चबायें, इस मसाले में ताजा सांस देने के लिये रोगाणुरोधी गुण है। आप इलायची या लौंग जैसे अन्य प्रामाणिक मसाले का भी उपयोग कर सकते हैं।

(4)चाय भी आपकी बुरी सांसों पर नियंत्रण में सहायता करता है। किसी भी तरह की चाय काली या हरी चाय में पॉलीफेनॉल्स यौगिक होता है जो बैक्टीरिया की वृद्धि को रोकता है जो बुरी सांसों का कारण बनता है। चाय जो हमेशा आपकी रसोई घर में उपलब्ध होता है आसानी से बुरी सांसों से छुटकारा दिलाने में मदद करता है। आप नियमित एक कप चाय या हरी चाय पी सकते हैं और बुरी सांसों को हटा सकते हैं।

(5)अजमोद में क्लोरोफिल शामिल है, जो वास्तव में बुरी सांसों को नियंत्रित करता है। ताजा अजमोद पत्तियों का एक गुच्छा ले और सिरके में भिगो दें। दो से तीन मिनट तक पत्ते को चबायें और अपने मुँह में ताजगी महसूस करें। आप अजमोद रस भी बना सकते है, और आप कभी भी पी सकते हैं जब आप ताजगी महसूस करना चाहते हैं। अजमोद में अन्य लाभकारी कारक है जो पाचन और पेट की गैस में आराम पहुंचाता है।

इसलिए जरूरी है ब्रश करना :-

सुबह बिस्तर छोड़ते ही हमारा सबसे पहला काम ब्रश करना ही होता है। बचपन से लेकर बुढ़ापे तक दांतों की सफाई व ताजगी के लिए ब्रश करना हमारी जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है। दांतों की रोज दिन में दो बार सफाई करना बेहद जरूरी है। दांतों की सफाई करने से सांसों की तकलीफ व मुंह की अन्‍य बीमारियां नहीं होतीं। इसके साथ ही एक हालिया शोध कहता है कि याद्दाश्‍त को दुरुस्‍त रखने में भी दांतों की सफाई जरूरी है। हाल में किए एक शोध में बताया गया है कि वयस्कों द्वारा अपने दांतों की उचित देखभाल करना यानी नियमित रूप से ब्रश करना याददाश्त बनाए रखने में मददगार साबित होता है।

क्या कहता है शोध दातों के सडन और पायरिया के विषय में-

(1)पहले के शोधों में भी दांतों की साफ-सफाई न रखने को डिमेंशिया (याददाश्त कम होना) समेत हृदयरोग, स्ट्रोक व डायबिटीज के लिए जिम्मेदार बताया गया था। न्यूयार्क के कोलंबिया कालेज के शोधकर्ताओं के मुताबिक मसूढ़ों की बीमारी मस्तिष्क की क्रियाविधि को प्रभावित करने के साथ पूरे शरीर में जलन पैदा करती है।

(2)शोध में 60 साल व उससे ज्यादा उम्र के लोगों को शामिल किया गया। जिन लोगों में मसूढ़ों की बीमारी के लिए जिम्मेदार पैथोजन ज्यादा पाया गया उनमें याददाश्त संबंधी दिक्कतें देखी गईं। प्रमुख शोधकर्ता डा. जेम्स नोबल ने बताया, ‘जिन लोगों में पैथोजन का उच्च स्तर पाया गया उनमें याददाश्त की गंभीर परेशानी देखी गई। शोध से साफ है कि दांतों-मसूढ़ों की उचित देखभाल न करने से डिमेंशिया का खतरा पैदा हो सकता है।

गलत तरीके से ब्रश करना हो सकता है दातों के सडन और पायरिया :-

  • सही तरीके से बश न करने से कैविटी, पायरिया जैसी समस्‍या होती है।
  • ब्रश का चुनाव करते वक्‍त सावधानी बरतें, ब्रश का आकार मध्‍यम हो।
  • एक दिन में दो बार से कम या उससे अधिक बार ब्रश प्रयोग न करें।
  • ब्रश को हाइजीन मुक्‍त रखें और हर तीन महीने पर उसे जरूर बदलें

सही तरीके से ब्रश न करने और ब्रश का चुनाव करते वक्‍त गलती के कारण भी दांतों से संबंधित समस्‍यायें हो सकती हैं। अगर सही तरीके से ब्रश न किया जाये तो दांतों में कैविटी, पायरिया, आदि की समस्‍या हो सकती है।

इसलिए ब्रश करते वक्‍त सावधानी बरतें और इसमें जल्‍दबाजी बिलकुल भी न करें। डेंटिस्‍ट भी यही सुझाव देते हैं कि सही तरीके से ब्रश करके ही दांतों की समस्‍या से बचाव किया जा सकता है। तो सही तरीके से ब्रश करने की आदत डालें और अपने दांतों को बीमारियों से बचायें।

(1)सही ब्रश का प्रयोग :-

ब्रश का चुनाव करते वक्‍त हमेशा सावधानी बरतनी चाहिए। ब्रश का आकार बड़ा और छोटा नहीं होना चाहिए, ब्रश मध्‍यम आकार का प्रयोग कीजिए। बड़ा ब्रश अंदर तक पहुंच नहीं पायेगा और छोटा ब्रश सफाई के लिए बहुत समय लेगा। इसके अलावा ब्रश पकड़ने में भी सही होना चाहिए, उसकी पकड़ भी अच्‍छी हो। ब्रिटिश के सेंट्रल हेल्‍थ फाउंडेशन मुलायम ब्रश का प्रयोग करने की सलाह देता है।

(2)ब्रश की गलत आदतें :-

ए‍क दिन में दो बार ब्रश करने की सलाह चिकित्‍सक भी देते हैं। लेकिन अगर आप अपने दांतों और मसूड़ों को स्‍वस्‍थ रखना चाहते हैं तो किसी भी मीठे पेय पदार्थ का सेवन करने के बाद मुंह जरूर साफ करें। इसके अलावा दिन में 3 या 4 बार भी ब्रश करने से बचें। सुबह उठने के बाद और सोने से पहले ब्रश करना ही दांतों को स्‍वस्‍थ रखने के लिए पर्याप्‍त है। आराम से 2 या 3 मिनट ब्रश करना ही काफी है।

(3)दांतों की अंदर तक सफाई:-

कुछ लोग ब्रश करते वक्‍त केवल बाहरी दांतों की सफाई ही करते हैं। प्‍लेक जैसी समस्‍यायें दांतों के अंदर की सतह से शुरू होती हैं। इसलिए दांतों की सफाई करते वक्‍त अंदर तक साफ करें।

(4)ब्रश को हाइजीन मुक्‍त रखें :-

अगर आप ब्रश को बॉथरूम में रखते हैं तब उस जगह पर नमी होने के कारण उसमें कीटाणु पनपने लगते हैं, इसलिए जरूरी है कि ब्रश को सूखी जगह पर रखें। अगर ब्रश का कवर हो तो उसे जरूर लगायें। ब्रश करने से पहले और ब्रश करने के बाद ब्रश को जरूर साफ करें।

Brushing Mistakes Harming Teeth in Hindi

(5) ब्रश न बदलना :-

अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन यह सुझाव देता है कि अपने ब्रश को हमेशा 3 महीने के अंतराल पर बदलते रहना चाहिए। क्‍योंकि 3 महीने के बाद ब्रश के ब्रिस्‍टल्‍स टूटने लगते हैं। इसलिए समय पर ब्रश को बदल देना चाहिए।

दांतों को बीमारियों से बचाने के लिए जरूरी है कि आप ब्रश करने के सही तरीके के साथ-साथ सही ब्रश के प्रयोग के बारे में जानें। ऐसा करके आप अपने दांतों को स्‍वस्‍थ और मजबूत रखने में मदद कर सकते हैं।

  • रात को सोने से पहले ब्रश करना है जरूरी।
  • ब्रश ना करने से दांतों में हो जाती है कैविटी।
  • कैविटी के कारण दांतों में बढ़ते हैं कीटाणु।
  • प्‍लॉक जमा होने से दांतों में बढ़ता है पीलापन।

रात को सोने से पहले ब्रश न करने की आदत आपको महंगी पड़ सकती है। सभी डॉक्टर दांतों को रोजाना दो बार दो मिनट तक ब्रश करने की सलाह देते हैं। यदि आपके पास इतना भी ब्रश करने का समय नहीं है तो रात में सोने से पहले दांतों को एक बार जरुर ब्रश करें। इस दौरान आपके मुंह में कम थूक बनता है, जो कि कैविटी पैदा करने वाले पदार्थों को बढ़ावा देने में मददगार होता है। इस लेख में विस्‍तार से जानिये सोने से पहले ब्रश करना क्‍यों है जरूरी।

(6) ब्रश न करना है नुकसानदायक :-

दांतों को ब्रश करने से आप उसमें फंसे भोजन के टुकड़े और प्‍लाक को निकालने में मदद करते हैं, जो कि दांतों में बैक्‍टीरिया पैदा करने का कार्य करते हैं। ऐसे आहार जिसमें शक्‍कर की मात्रा अधिक होती है, उसे खाने के बाद जरुर दांत साफ कर लें क्‍योंकि बैक्‍टीरिया टूथ इनेमल पर अपना एसिड छोड़ता है। ऐसा होने पर दांत सड़ने लगते हैं।साथ ही प्‍लाक को अगर ना हटाया जाए तो यह दांतों पर अपनी पकड़ मजबूत बना लेगा और दांतों को कभी भी साफ नहीं रहने देगा। अगर आप यह जानना चाहते हैं कि आपको दिन में कितने दफा दांतों को ब्रश करना चाहिये तो यह सीधा निर्भर करता है कि आपने उस दिन कौन सा खाद्य पदार्थ खाया है।

(7) क्यों होती है दातों के सडन और पायरिया :-

मुंह और दांतों की तमाम बीमारियों के पीछे एक बड़ी वजह हमारा लापरवाह लाइफ स्टाइल है और खानपान है। स्टिकी फूड हमारे खानपान का अहम हिस्सा है और इसे खाने के बाद हम दांत साफ नहीं करते। हम हेल्दी रहने के लिए रात में दूध तो जरूर पीते हैं मगर उसके बाद ब्रश करना जरूरी नहीं समझते। मुंह से आने वाली बदबू को हम बीमारी की शुरुआत ही नहीं मानते।
Dental care

(8)कैसे करे दांतों की सफाई और बचें दातों के सडन और पायरिया से  :-

कुछ भी खाने के बाद ब्रश न भी करो, तो कुल्ला जरूर करो। रात को सोने से पहले ब्रश करने की आदत जरूर अपनाओ। हमेशा फ्लोराइड युक्त टूथ-पेस्ट और गोल ब्रिसल के सॉफ्ट टूथ ब्रश का इस्तेमाल करो। ब्रश करते समय ध्यान रखो कि बहुत दबा कर ब्रश न करो। ब्रश को 45 डिग्री कोण पर पकड़ कर आगे-पीछे, ऊपर-नीचे, अंदर-बाहर धीरे-धीरे घुमाते हुए हल्के हाथों से ब्रश करो। दांतों के साथ जीभ को साफ करना न भूलना।अगर आपके दांत स्‍वस्‍थ रहेंगे तो खाने में कोई समस्‍या नहीं होगी और आपका पूरा शरीर स्‍वस्‍थ रहेगा, इसलिए दांतों की सफाई पर विशेष ध्‍यान दीजिए।

(9)क्‍या है दातों के सडन और पायरिया और इसके कारण :-

  • दांतो की सफाई में लापरवाही से होता है पायरिया।
  • मुंह के बैक्टीरिया दांतों को पंहुचाते है नुकसान।
  • कैल्शियम की कमी पायरिया का मुख्य कारण।
  • सावधानी से करे दांतो और मसूड़ों की देखभाल।

दांतों की सही तरीके से अगर देखभाल न की जाए तो पायरिया हो सकता है। दांतों को सेहत और सुंदरता का आईना माना जाता है। लेकिन, खाने के बाद मुंह की साफ-सफाई न करने से दांतों में कई प्रकार की बीमारियां शुरू हो जाती हैं। दांतों की साफ सफाई में कमी के कारण जो बीमारी सबसे जल्दी होती है वो है पायरिया। सांसों की बदबू, मसूड़ों में खून और दूसरी तरह की कई परेशानियां पायरिया के लक्षण हैं। दातों की साफ-सफाई न करने के कारण पायरिया एक सामान्य बीमारी बन गई है। पायरिया के कारण असमय दांत गिर सकते हैं।

 

Dental care in Hindi

(10) दातों के सडन और पायरिया क्यों होता है :-

दरअसल मुंह में लगभग 700 किस्म के बैक्टीरिया होते हैं, जिनकी संख्या करोडों में होती है। यही बैक्टीरिया दांतों और मुंह को बीमारियों से बचाते हैं। अगर मुंह, दांत और जीभ की सफाई ठीक से न की जाए तो ये बैक्टीरिया दांतो और मसूडों को नुकसान पहुंचाते हैं। पायरिया होने पर दांतों को सपोर्ट करने वाली जबडे की हड्डियों को नुकसान होता है। पायरिया शरीर में कैल्शियम की कमी होने से मसूड़ों की खराबी और दांत-मुंह की साफ सफाई में कोताही बरतने से होता है। इस रोग में मसूड़े पिलपिले और खराब हो जाते हैं और उनसे खून आता है। सांसों की बदबू की वजह भी पायरिया को ही माना जाता है।

(11) दातों के सडन और पायरिया के लक्षण :-

पायरिया होने पर सांसो में तेज दुर्गंध शुरू हो जाती है। मसूडों में सूजन होने लगती है। दांत कमजोर होकर हिलने लगते हैं। गर्म और ज्यादा ठंडा पानी पीने पर दांत संवेदनशील हो जाते हैं और लोग उसे बर्दास्त नही कर पाते हैं। पायरिया होने पर मसूडों से मवाद आना शुरू हो जाता है। मसूडों को दबाने में और छूने पर दर्द होता है। पायरिया की शिकायत होने पर मसूडों से खून निकलने लगता है। दो दांतों के बीच की जगह बढ जाती है, दांतों में गैप होने लगता है।

दातों के सडन और पायरिया

(12) दातों के सडन और पायरिया से बचने के लिए सावधानी :-

खाने के बाद मुंह की अंदरुनी साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।ब्रश करते समय दांतों को अच्छी तरह से और आराम से साफ करें।टंग क्लीनर से जीभ को अच्छी तरह साफ करें। दांतों की सफाई के लिए कठोर ब्रश की बजाय कोमल ब्रश का इस्तेमाल करें। रात में डिनर करने के बाद सोने से पहले भी ब्रश करें। ब्रश करते समय ध्यान रखिए कि खाने का कोई टुकडा दांतों के बीच फंसा तो नही है। कुछ भी खाने के बाद अगर ब्रश नहीं कर सकते हैं तो पानी से दांतों की सफाई कर लेनी चाहिए। अच्छे दांत सेहत और सुंदरता की निशानी होती है। इसलिए अपने दांतों का ख्याल जरूर रखें। पायरिया का अगर समय पर इलाज न कराया जाए तो दांत ढीले होकर गिर जाते हैं। पायरिया का इलाज बडी आसानी से हो सकता है। पायरिया की समस्या होने पर जल्द से जल्द चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

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